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Swami Sukhabodhananda discourse on bravery

Swami Sukhabodhananda's Discourse on Bravery Part 1

Swami Sukhabodhananda's Discourse on Bravery Part 2

Swami Sukhabodhananda's Discourse on Bravery Part 3

Swami Sukhabodhananda's Discourse on Bravery Part 4

GGY 47&48

Opening Up of Excellence - (Bhagavad Gita - Vol. 45 & 46)

GOT 2

LUGI

TERI

Purity of Being - (Bhagavad Gita - Vol. 55 & 56)

Then Mind...The Movement - GGY Vol. 47 & 48 .MPG

Purity of Being - (Bhagavad Gita - Vol. 55 & 56)

Growth Oriented Living - (Bhagavad Gita - Vol. 51 & 52)

Living Consciously - Handling Inner Conflict (Bhagavad Gita Vol. 1 & 2)

Happy, Here & Now (Bhagavad Gita - Vol. 5 & 6)

Joy in Detachment & Wonderment (Bhagavad Gita - Vol. 13 & 14)

GOT 2

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Contents of this list:

Swami Sukhabodhananda's Discourse on Bravery Part 1
Swami Sukhabodhananda's Discourse on Bravery Part 2
Swami Sukhabodhananda's Discourse on Bravery Part 3
Swami Sukhabodhananda's Discourse on Bravery Part 4
GGY 47&48
Opening Up of Excellence - (Bhagavad Gita - Vol. 45 & 46)
GOT 2
LUGI
TERI
Purity of Being - (Bhagavad Gita - Vol. 55 & 56)
Then Mind...The Movement - GGY Vol. 47 & 48 .MPG
Purity of Being - (Bhagavad Gita - Vol. 55 & 56)
Growth Oriented Living - (Bhagavad Gita - Vol. 51 & 52)
Living Consciously - Handling Inner Conflict (Bhagavad Gita Vol. 1 & 2)
Happy, Here & Now (Bhagavad Gita - Vol. 5 & 6)
Joy in Detachment & Wonderment (Bhagavad Gita - Vol. 13 & 14)
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सांवरिया है सेठ ,मेरी राधा जी सेठानी
यह तो सारी दुनिया जाने है
मेरा यार यशुदा कुंवर हो चूका है
वो दिल हो चूका है जिगर हो चूका है
अपने दिल का दरवाजा हम खोल के सोते है
सपने में आ जाना मईया,ये बोल के सोते है
ये सारे खेल तुम्हारे है
जग कहता खेल नसीबों का
दिल लूटके ले गया नी सहेलियो मेरा
मैं तक्दी रह गयी नी सहेलियो लगदा
ये तो बतादो बरसानेवाली,मैं कैसे
तेरी कृपा से है यह जीवन है मेरा,कैसे
मेरी करुणामयी सरकार, मिला दो ठाकुर से
कृपा करो भानु दुलारी, श्री राधे
जीवन खतम हुआ तो जीने का ढंग आया
जब शमा बुझ गयी तो महफ़िल में रंग आया
तू राधे राधे गा ,
तोहे मिल जाएं सांवरियामिल जाएं
मीठे रस से भरी रे, राधा रानी लागे,
मने कारो कारो जमुनाजी रो पानी लागे
मुझे रास आ गया है, तेरे दर पे सर झुकाना
तुझे मिल गया पुजारी, मुझे मिल गया
कैसे जीऊं मैं राधा रानी तेरे बिना
मेरा मन ही न लगे श्यामा तेरे बिना
सांवरियो है सेठ, म्हारी राधा जी
यह तो जाने दुनिया सारी है
मुझे चाहिए बस सहारा तुम्हारा,
के नैनों में गोविन्द नज़ारा तुम्हार
वृन्दावन के बांके बिहारी,
हमसे पर्दा करो ना मुरारी ।
ज़रा छलके ज़रा छलके वृदावन देखो
ज़रा हटके ज़रा हटके ज़माने से देखो
वृंदावन में हुकुम चले बरसाने वाली का,
कान्हा भी दीवाना है श्री श्यामा
हे राम, हे राम, हे राम, हे राम
जग में साचे तेरो नाम । हे राम...
राधा नाम की लगाई फुलवारी, के पत्ता
के पत्ता पत्ता श्याम बोलता, के पत्ता
कोई कहे गोविंदा, कोई गोपाला।
मैं तो कहुँ सांवरिया बाँसुरिया वाला॥
हम प्रेम दीवानी हैं, वो प्रेम दीवाना।
ऐ उधो हमे ज्ञान की पोथी ना सुनाना॥
तेरे दर की भीख से है,
मेरा आज तक गुज़ारा
जिनको जिनको सेठ बनाया वो क्या
उनसे तो प्यार है हमसे तकरार है ।
सब के संकट दूर करेगी, यह बरसाने वाली,
बजाओ राधा नाम की ताली ।
राधा ढूंढ रही किसी ने मेरा श्याम देखा
श्याम देखा घनश्याम देखा
श्री राधा हमारी गोरी गोरी, के नवल
यो तो कालो नहीं है मतवारो, जगत उज्य
कहना कहना आन पड़ी मैं तेरे द्वार ।
मुझे चाकर समझ निहार ॥
यह मेरी अर्जी है,
मैं वैसी बन जाऊं जो तेरी मर्ज़ी है
तेरे बगैर सांवरिया जिया नही जाये
तुम आके बांह पकड लो तो कोई बात बने‌॥
दाता एक राम, भिखारी सारी दुनिया ।
राम एक देवता, पुजारी सारी दुनिया ॥