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Rishikesh

Yog Vashisht by Swami Shravananandji Part-1

Yog Vashisht by Swami Shravananandji Part-68

Yog Vashisht by Swami Shravananandji Part-87

Yog Vashisht by Swami Shravananandji Part-5

Yog Vashisht by Swami Shravananandji Part-8

Yog Vashisht by Swami Shravananandji Part-10

Yog Vashisht by Swami Shravananandji Part-89

Yog Vashisht by Swami Shravananandji Part-84

Yog Vashisht by Swami Shravananandji Part-29

Yog Vashisht by Swami Shravananandji Part-81

Yog Vashisht by Swami Shravananandji Part-6

Yog Vashisht by Swami Shravananandji Part-82

Yog Vashisht by Swami Shravananandji Part-2

Yog Vashisht by Swami Shravananandji Part-14

Contents of this list:

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Yog Vashisht by Swami Shravananandji Part-68
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राधे मोरी बंसी कहा खो गयी,
कोई ना बताये और शाम हो गयी,
अच्युतम केशवं राम नारायणं,
कृष्ण दमोधराम वासुदेवं हरिं,
लाली की सुनके मैं आयी
कीरत मैया दे दे बधाई
फूलों में सज रहे हैं, श्री वृन्दावन
और संग में सज रही है वृषभानु की
लाडली अद्बुत नज़ारा तेरे बरसाने में
लाडली अब मन हमारा तेरे बरसाने में है।
मेरी रसना से राधा राधा नाम निकले,
हर घडी हर पल, हर घडी हर पल।
श्यामा तेरे चरणों की गर धूल जो मिल
सच कहता हूँ मेरी तकदीर बदल जाए॥
बोल कान्हा बोल गलत काम कैसे हो गया,
बिना शादी के तू राधे श्याम कैसे हो
हो मेरी लाडो का नाम श्री राधा
श्री राधा श्री राधा, श्री राधा श्री
इक तारा वाजदा जी हर दम गोविन्द
जग ताने देंदा ए, तै मैनु कोई फरक नहीं
दाता एक राम, भिखारी सारी दुनिया ।
राम एक देवता, पुजारी सारी दुनिया ॥
मुझे चाहिए बस सहारा तुम्हारा,
के नैनों में गोविन्द नज़ारा तुम्हार
राधा नाम की लगाई फुलवारी, के पत्ता
के पत्ता पत्ता श्याम बोलता, के पत्ता
कोई कहे गोविंदा कोई गोपाला,
मैं तो कहूँ सांवरिया बांसुरी वाला ।
राधे राधे बोल, राधे राधे बोल,
बरसाने मे दोल, के मुख से राधे राधे बोल,
राधे राधे बोल, श्याम भागे चले आयंगे।
एक बार आ गए तो कबू नहीं जायेंगे ॥
हम प्रेम दीवानी हैं, वो प्रेम दीवाना।
ऐ उधो हमे ज्ञान की पोथी ना सुनाना॥
तेरे दर की भीख से है,
मेरा आज तक गुज़ारा
मीठे रस से भरी रे, राधा रानी लागे,
मने कारो कारो जमुनाजी रो पानी लागे
मेरा आपकी कृपा से,
सब काम हो रहा है
मुझे रास आ गया है,
तेरे दर पे सर झुकाना
दिल लूटके ले गया नी सहेलियो मेरा
मैं तक्दी रह गयी नी सहेलियो लगदा
प्रभु कर कृपा पावँरी दीन्हि
सादर भारत शीश धरी लीन्ही
ना मैं मीरा ना मैं राधा,
फिर भी श्याम को पाना है ।
मेरी करुणामयी सरकार पता नहीं क्या दे
क्या दे दे भई, क्या दे दे
ज़िंदगी मे हज़ारो का मेला जुड़ा
हंस जब जब उड़ा तब अकेला उड़ा
तीनो लोकन से न्यारी राधा रानी हमारी।
राधा रानी हमारी, राधा रानी हमारी॥
राधा कट दी है गलिआं दे मोड़ आज मेरे
श्याम ने आना घनश्याम ने आना
अपनी वाणी में अमृत घोल
अपनी वाणी में अमृत घोल
श्री राधा हमारी गोरी गोरी, के नवल
यो तो कालो नहीं है मतवारो, जगत उज्य