Share this page on following platforms.

Home Gurus Shravananandji

Rishikesh 14 Videos
yog vashisht 21 Videos

Yog

Yog 68 Videos
Gokaran Gita 9 Videos
Yog Vaishist 36 Videos
Vedanta 5 Videos
Bhajan 4 Videos
Yogvasist 29 Videos
satsang 85 Videos
devotional 27 Videos
Yoga Vasishtha 11 Videos
Yog Vashistha 7 Videos
ALOK 18 Videos
Sita 66 Videos
Home satsang 286 Videos

Bhajan Lyrics View All

श्यामा तेरे चरणों की गर धूल जो मिल
सच कहता हूँ मेरी तकदीर बदल जाए॥
वृन्दावन के बांके बिहारी,
हमसे पर्दा करो ना मुरारी ।
मुझे चढ़ गया राधा रंग रंग, मुझे चढ़
श्री राधा नाम का रंग रंग, श्री राधा
मुझे चाहिए बस सहारा तुम्हारा,
के नैनों में गोविन्द नज़ारा तुम्हार
एक दिन वो भोले भंडारी बन कर के ब्रिज
पारवती भी मना कर ना माने त्रिपुरारी,
राधा कट दी है गलिआं दे मोड़ आज मेरे
श्याम ने आना घनश्याम ने आना
जिनको जिनको सेठ बनाया वो क्या
उनसे तो प्यार है हमसे तकरार है ।
कैसे जिऊ मैं राधा रानी तेरे बिना
मेरा मन ही ना लागे तुम्हारे बिना
फूलों में सज रहे हैं, श्री वृन्दावन
और संग में सज रही है वृषभानु की
ज़रा छलके ज़रा छलके वृदावन देखो
ज़रा हटके ज़रा हटके ज़माने से देखो
मेरा यार यशुदा कुंवर हो चूका है
वो दिल हो चूका है जिगर हो चूका है
ਮੇਰੇ ਕਰਮਾਂ ਵੱਲ ਨਾ ਵੇਖਿਓ ਜੀ,
ਕਰਮਾਂ ਤੋਂ ਸ਼ਾਰਮਾਈ ਹੋਈ ਆਂ
कोई कहे गोविंदा, कोई गोपाला।
मैं तो कहुँ सांवरिया बाँसुरिया वाला॥
हम प्रेम दीवानी हैं, वो प्रेम दीवाना।
ऐ उधो हमे ज्ञान की पोथी ना सुनाना॥
मोहे आन मिलो श्याम, बहुत दिन बीत गए।
बहुत दिन बीत गए, बहुत युग बीत गए ॥
ये सारे खेल तुम्हारे है
जग कहता खेल नसीबों का
मेरी करुणामयी सरकार, मिला दो ठाकुर से
कृपा करो भानु दुलारी, श्री राधे
मेरा आपकी कृपा से,
सब काम हो रहा है
दाता एक राम, भिखारी सारी दुनिया ।
राम एक देवता, पुजारी सारी दुनिया ॥
मन चल वृंदावन धाम, रटेंगे राधे राधे
मिलेंगे कुंज बिहारी, ओढ़ के कांबल
प्रभु कर कृपा पावँरी दीन्हि
सादर भारत शीश धरी लीन्ही
Ye Saare Khel Tumhare Hai Jag
Kahta Khel Naseebo Ka
दिल की हर धड़कन से तेरा नाम निकलता है
तेरे दर्शन को मोहन तेरा दास तरसता है
हम हाथ उठाकर कह देंगे हम हो गये राधा
राधा राधा राधा राधा
वृंदावन में हुकुम चले बरसाने वाली का,
कान्हा भी दीवाना है श्री श्यामा
यह मेरी अर्जी है,
मैं वैसी बन जाऊं जो तेरी मर्ज़ी है
हम राम जी के, राम जी हमारे हैं
वो तो दशरथ राज दुलारे हैं
बहुत बड़ा दरबार तेरो बहुत बड़ा दरबार,
चाकर रखलो राधा रानी तेरा बहुत बड़ा
अपनी वाणी में अमृत घोल
अपनी वाणी में अमृत घोल
हम प्रेम नगर के बंजारिन है
जप ताप और साधन क्या जाने