Share this page on following platforms.

Home Gurus Sanjeev Krishna Thakur Ji

Shri

MUJHKO DEEWANA BANA GAYA RE BY SHRI SANJEEV KRISHNA THAKUR JI

swami dharam dev ji(bhajan)

Contents of this list:

baso mere nainan me nandlal_29_09_2014_16_49_50.mp
Raghvendra Parashar
Raghvendra Parashar
Bhagwat ji
kab darshan denge
parashar ji
MUJHKO DEEWANA BANA GAYA RE BY SHRI SANJEEV KRISHNA THAKUR JI
swami dharam dev ji(bhajan)

Bhajan Lyrics View All

सब के संकट दूर करेगी, यह बरसाने वाली,
बजाओ राधा नाम की ताली ।
कोई कहे गोविंदा कोई गोपाला,
मैं तो कहूँ सांवरिया बांसुरी वाला ।
एक दिन वो भोले भंडारी बन कर के ब्रिज
पारवती भी मना कर ना माने त्रिपुरारी,
ना मैं मीरा ना मैं राधा,
फिर भी श्याम को पाना है ।
जिनको जिनको सेठ बनाया वो क्या
उनसे तो प्यार है हमसे तकरार है ।
श्री राधा हमारी गोरी गोरी, के नवल
यो तो कालो नहीं है मतवारो, जगत उज्य
अपने दिल का दरवाजा हम खोल के सोते है
सपने में आ जाना मईया,ये बोल के सोते है
मेरी करुणामयी सरकार पता नहीं क्या दे
क्या दे दे भई, क्या दे दे
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से
गोविन्द नाम लेकर, फिर प्राण तन से
तमन्ना यही है के उड के बरसाने आयुं मैं
आके बरसाने में तेरे दिल की हसरतो को
बांके बिहारी की देख छटा,
मेरो मन है गयो लटा पटा।
बहुत बड़ा दरबार तेरो बहुत बड़ा दरबार,
चाकर रखलो राधा रानी तेरा बहुत बड़ा
राधे राधे बोल, श्याम भागे चले आयंगे।
एक बार आ गए तो कबू नहीं जायेंगे ॥
मेरे जीवन की जुड़ गयी डोर, किशोरी तेरे
किशोरी तेरे चरणन में, महारानी तेरे
बोल कान्हा बोल गलत काम कैसे हो गया,
बिना शादी के तू राधे श्याम कैसे हो
अपनी वाणी में अमृत घोल
अपनी वाणी में अमृत घोल
जीवन खतम हुआ तो जीने का ढंग आया
जब शमा बुझ गयी तो महफ़िल में रंग आया
कोई कहे गोविंदा, कोई गोपाला।
मैं तो कहुँ सांवरिया बाँसुरिया वाला॥
कोई पकड़ के मेरा हाथ रे,
मोहे वृन्दावन पहुंच देओ ।
श्याम बुलाये राधा नहीं आये,
आजा मेरी प्यारी राधे बागो में झूला
मुझे रास आ गया है, तेरे दर पे सर झुकाना
तुझे मिल गया पुजारी, मुझे मिल गया
सांवरियो है सेठ, म्हारी राधा जी
यह तो जाने दुनिया सारी है
तुम रूठे रहो मोहन,
हम तुमको मन लेंगे
तेरे दर की भीख से है,
मेरा आज तक गुज़ारा
वृन्दावन के बांके बिहारी,
हमसे पर्दा करो ना मुरारी ।
मेरा यार यशुदा कुंवर हो चूका है
वो दिल हो चूका है जिगर हो चूका है
यशोमती मैया से बोले नंदलाला,
राधा क्यूँ गोरी, मैं क्यूँ काला
मुझे चाहिए बस सहारा तुम्हारा,
के नैनों में गोविन्द नज़ारा तुम्हार
राधे मोरी बंसी कहा खो गयी,
कोई ना बताये और शाम हो गयी,
फूलों में सज रहे हैं, श्री वृन्दावन
और संग में सज रही है वृषभानु की