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RAMKATHA CHINMAYANAND BABU

Contents of this list:

Sundarkand - Ram Katha By Shri Chinmayanand Bapu 04
Sundarkand - Ram Katha By Shri Chinmayanand Bapu 05
Sundarkand - Ram Katha By Shri Chinmayanand Bapu 01
Sundarkand - Ram Katha By Shri Chinmayanand Bapu 02
Sundarkand - Ram Katha By Shri Chinmayanand Bapu 03

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बांके बिहारी की देख छटा,
मेरो मन है गयो लटा पटा।
मन चल वृंदावन धाम, रटेंगे राधे राधे
मिलेंगे कुंज बिहारी, ओढ़ के कांबल
नी मैं दूध काहे नाल रिडका चाटी चो
लै गया नन्द किशोर लै गया,
प्रीतम बोलो कब आओगे॥
बालम बोलो कब आओगे॥
हम हाथ उठाकर कह देंगे हम हो गये राधा
राधा राधा राधा राधा
हम प्रेम नगर के बंजारिन है
जप ताप और साधन क्या जाने
फूलों में सज रहे हैं, श्री वृन्दावन
और संग में सज रही है वृषभानु की
कान्हा की दीवानी बन जाउंगी,
दीवानी बन जाउंगी मस्तानी बन जाउंगी,
करदो करदो बेडा पार, राधे अलबेली सरकार।
राधे अलबेली सरकार, राधे अलबेली
जीवन खतम हुआ तो जीने का ढंग आया
जब शमा बुझ गयी तो महफ़िल में रंग आया
प्रभु कर कृपा पावँरी दीन्हि
सादर भारत शीश धरी लीन्ही
वृदावन जाने को जी चाहता है,
राधे राधे गाने को जी चाहता है,
ना मैं मीरा ना मैं राधा,
फिर भी श्याम को पाना है ।
ਮੇਰੇ ਕਰਮਾਂ ਵੱਲ ਨਾ ਵੇਖਿਓ ਜੀ,
ਕਰਮਾਂ ਤੋਂ ਸ਼ਾਰਮਾਈ ਹੋਈ ਆਂ
श्यामा तेरे चरणों की गर धूल जो मिल
सच कहता हूँ मेरी तकदीर बदल जाए॥
कैसे जिऊ मैं राधा रानी तेरे बिना
मेरा मन ही ना लागे तुम्हारे बिना
यह मेरी अर्जी है,
मैं वैसी बन जाऊं जो तेरी मर्ज़ी है
तेरे दर की भीख से है,
मेरा आज तक गुज़ारा
एक कोर कृपा की करदो स्वामिनी श्री
दासी की झोली भर दो लाडली श्री राधे॥
मुझे रास आ गया है,
तेरे दर पे सर झुकाना
हो मेरी लाडो का नाम श्री राधा
श्री राधा श्री राधा, श्री राधा श्री
हर पल तेरे साथ मैं रहता हूँ,
डरने की क्या बात? जब मैं बैठा हूँ
ये सारे खेल तुम्हारे है
जग कहता खेल नसीबों का
एक दिन वो भोले भंडारी बन कर के ब्रिज
पारवती भी मना कर ना माने त्रिपुरारी,
मुझे रास आ गया है, तेरे दर पे सर झुकाना
तुझे मिल गया पुजारी, मुझे मिल गया
दुनिया से मैं हारा तो आया तेरे द्वार,
यहाँ से गर जो हरा कहाँ जाऊँगा सरकार
रंगीलो राधावल्लभ लाल, जै जै जै श्री
विहरत संग लाडली बाल, जै जै जै श्री
राधा नाम की लगाई फुलवारी, के पत्ता
के पत्ता पत्ता श्याम बोलता, के पत्ता
मोहे आन मिलो श्याम, बहुत दिन बीत गए।
बहुत दिन बीत गए, बहुत युग बीत गए ॥
ज़िंदगी मे हज़ारो का मेला जुड़ा
हंस जब जब उड़ा तब अकेला उड़ा