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Bhagwat katha Nadiad Gujarat Pujya Shri Chinmayanand Bapu Ji

Pujya Shri Chinmayanand Bapu Ji (Day 01) Bhagwat katha Nadiad Gujarat

Pujya Shri Chinmayanand Bapu Ji (Day 2) Bhagwat katha Nadiad Gujarat

Pujya Shri Chinmayanand Bapu Ji (Day 3) Bhagwat katha Nadiad Gujarat

Pujya Shri Chinmayanand Bapu Ji (Day 4) Bhagwat katha Nadiad Gujarat

Pujya Shri Chinmayanand Bapu Ji (Day 5) Bhagwat katha Nadiad Gujarat

Pujya Shri Chinmayanand Bapu Ji (Day 6) Bhagwat katha Nadiad Gujarat

Pujya Shri Chinmayanand Bapu Ji (Day 7) Bhagwat katha Nadiad Gujarat

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Pujya Shri Chinmayanand Bapu Ji (Day 7) Bhagwat katha Nadiad Gujarat

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जिनको जिनको सेठ बनाया वो क्या
उनसे तो प्यार है हमसे तकरार है ।
यशोमती मैया से बोले नंदलाला,
राधा क्यूँ गोरी, मैं क्यूँ काला
राधिका गोरी से ब्रिज की छोरी से ,
मैया करादे मेरो ब्याह,
यह मेरी अर्जी है,
मैं वैसी बन जाऊं जो तेरी मर्ज़ी है
राधा ढूंढ रही किसी ने मेरा श्याम देखा
श्याम देखा घनश्याम देखा
श्यामा तेरे चरणों की गर धूल जो मिल
सच कहता हूँ मेरी तकदीर बदल जाए॥
राधे तु कितनी प्यारी है ॥
तेरे संग में बांके बिहारी कृष्ण
हम राम जी के, राम जी हमारे हैं
वो तो दशरथ राज दुलारे हैं
राधे राधे बोल, श्याम भागे चले आयंगे।
एक बार आ गए तो कबू नहीं जायेंगे ॥
मुझे रास आ गया है,
तेरे दर पे सर झुकाना
कैसे जिऊ मैं राधा रानी तेरे बिना
मेरा मन ही ना लागे तुम्हारे बिना
आँखों को इंतज़ार है सरकार आपका
ना जाने होगा कब हमें दीदार आपका
बहुत बड़ा दरबार तेरो बहुत बड़ा दरबार,
चाकर रखलो राधा रानी तेरा बहुत बड़ा
लाडली अद्बुत नज़ारा तेरे बरसाने में
लाडली अब मन हमारा तेरे बरसाने में है।
मुझे रास आ गया है, तेरे दर पे सर झुकाना
तुझे मिल गया पुजारी, मुझे मिल गया
कहना कहना आन पड़ी मैं तेरे द्वार ।
मुझे चाकर समझ निहार ॥
सांवरियो है सेठ, म्हारी राधा जी
यह तो जाने दुनिया सारी है
जीवन खतम हुआ तो जीने का ढंग आया
जब शमा बुझ गयी तो महफ़िल में रंग आया
हे राम, हे राम, हे राम, हे राम
जग में साचे तेरो नाम । हे राम...
दुनिया का बन कर देख लिया, श्यामा का बन
राधा नाम में कितनी शक्ति है, इस राह पर
राधे मोरी बंसी कहा खो गयी,
कोई ना बताये और शाम हो गयी,
कोई कहे गोविंदा, कोई गोपाला।
मैं तो कहुँ सांवरिया बाँसुरिया वाला॥
ये सारे खेल तुम्हारे है
जग कहता खेल नसीबों का
साँवरिया ऐसी तान सुना,
ऐसी तान सुना मेरे मोहन, मैं नाचू तू गा
मुझे चढ़ गया राधा रंग रंग, मुझे चढ़
श्री राधा नाम का रंग रंग, श्री राधा
दिल की हर धड़कन से तेरा नाम निकलता है
तेरे दर्शन को मोहन तेरा दास तरसता है
कोई कहे गोविंदा कोई गोपाला,
मैं तो कहूँ सांवरिया बांसुरी वाला ।
ना मैं मीरा ना मैं राधा,
फिर भी श्याम को पाना है ।
हम प्रेम नगर के बंजारिन है
जप ताप और साधन क्या जाने
तेरी मुरली की धुन सुनने मैं बरसाने से
मैं बरसाने से आयी हूँ, मैं वृषभानु की