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Taittiriya Upanishad by Swami Mukundananda (JKYOG.org) Sorted 1 through18

Taittiriya Upanishad by Swami Mukundananda [Hindi]-Part 1/

Taittiriya Upanishad by Swami Mukundananda [Hindi]-Part 2/

Taittiriya Upanishad by Swami Mukundananda [Hindi]-Part 3/

Taittiriya Upanishad by Swami Mukundananda [Hindi]-Part 4/

Taittiriya Upanishad by Swami Mukundananda [Hindi]-Part 5/

Taittiriya Upanishad by Swami Mukundananda [Hindi]-Part 6/

Taittiriya Upanishad by Swami Mukundananda [Hindi]-Part 7/

Taittiriya Upanishad by Swami Mukundananda [Hindi]-Part 8/

Taittiriya Upanishad by Swami Mukundananda [Hindi]-Part 9/

Taittiriya Upanishad by Swami Mukundananda [Hindi]-Part 10/

Taittiriya Upanishad by Swami Mukundananda [Hindi]-Part 11/

Taittiriya Upanishad by Swami Mukundananda [Hindi]-Part 12/

Taittiriya Upanishad by Swami Mukundananda [Hindi]-Part 13/

Taittiriya Upanishad by Swami Mukundananda [Hindi]-Part 14/

Taittiriya Upanishad by Swami Mukundananda [Hindi]-Part 15/

Taittiriya Upanishad by Swami Mukundananda [Hindi]-Part 16/

Taittiriya Upanishad by Swami Mukundananda [Hindi]-Part 17/

Taittiriya Upanishad by Swami Mukundananda [Hindi]-Part /21

Contents of this list:

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Taittiriya Upanishad by Swami Mukundananda [Hindi]-Part 2/
Taittiriya Upanishad by Swami Mukundananda [Hindi]-Part 3/
Taittiriya Upanishad by Swami Mukundananda [Hindi]-Part 4/
Taittiriya Upanishad by Swami Mukundananda [Hindi]-Part 5/
Taittiriya Upanishad by Swami Mukundananda [Hindi]-Part 6/
Taittiriya Upanishad by Swami Mukundananda [Hindi]-Part 7/
Taittiriya Upanishad by Swami Mukundananda [Hindi]-Part 8/
Taittiriya Upanishad by Swami Mukundananda [Hindi]-Part 9/
Taittiriya Upanishad by Swami Mukundananda [Hindi]-Part 10/
Taittiriya Upanishad by Swami Mukundananda [Hindi]-Part 11/
Taittiriya Upanishad by Swami Mukundananda [Hindi]-Part 12/
Taittiriya Upanishad by Swami Mukundananda [Hindi]-Part 13/
Taittiriya Upanishad by Swami Mukundananda [Hindi]-Part 14/
Taittiriya Upanishad by Swami Mukundananda [Hindi]-Part 15/
Taittiriya Upanishad by Swami Mukundananda [Hindi]-Part 16/
Taittiriya Upanishad by Swami Mukundananda [Hindi]-Part 17/
Taittiriya Upanishad by Swami Mukundananda [Hindi]-Part /21

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राधा नाम की लगाई फुलवारी, के पत्ता
के पत्ता पत्ता श्याम बोलता, के पत्ता
राधिका गोरी से ब्रिज की छोरी से ,
मैया करादे मेरो ब्याह,
बांके बिहारी की देख छटा,
मेरो मन है गयो लटा पटा।
ना मैं मीरा ना मैं राधा,
फिर भी श्याम को पाना है ।
आँखों को इंतज़ार है सरकार आपका
ना जाने होगा कब हमें दीदार आपका
मुझे रास आ गया है,
तेरे दर पे सर झुकाना
प्रभु कर कृपा पावँरी दीन्हि
सादर भारत शीश धरी लीन्ही
तेरे बगैर सांवरिया जिया नही जाये
तुम आके बांह पकड लो तो कोई बात बने‌॥
अपनी वाणी में अमृत घोल
अपनी वाणी में अमृत घोल
वृंदावन में हुकुम चले बरसाने वाली का,
कान्हा भी दीवाना है श्री श्यामा
मुझे रास आ गया है, तेरे दर पे सर झुकाना
तुझे मिल गया पुजारी, मुझे मिल गया
मेरी करुणामयी सरकार, मिला दो ठाकुर से
कृपा करो भानु दुलारी, श्री राधे
हम हाथ उठाकर कह देंगे हम हो गये राधा
राधा राधा राधा राधा
ये तो बतादो बरसानेवाली,मैं कैसे
तेरी कृपा से है यह जीवन है मेरा,कैसे
मुझे चाहिए बस सहारा तुम्हारा,
के नैनों में गोविन्द नज़ारा तुम्हार
तुम रूठे रहो मोहन,
हम तुमको मन लेंगे
मन चल वृंदावन धाम, रटेंगे राधे राधे
मिलेंगे कुंज बिहारी, ओढ़ के कांबल
तेरे दर की भीख से है,
मेरा आज तक गुज़ारा
एक कोर कृपा की करदो स्वामिनी श्री
दासी की झोली भर दो लाडली श्री राधे॥
यह मेरी अर्जी है,
मैं वैसी बन जाऊं जो तेरी मर्ज़ी है
मुँह फेर जिधर देखु मुझे तू ही नज़र आये
हम छोड़के दर तेरा अब और किधर जाये
एक दिन वो भोले भंडारी बन कर के ब्रिज
पारवती भी मना कर ना माने त्रिपुरारी,
करदो करदो बेडा पार, राधे अलबेली सरकार।
राधे अलबेली सरकार, राधे अलबेली
बहुत बड़ा दरबार तेरो बहुत बड़ा दरबार,
चाकर रखलो राधा रानी तेरा बहुत बड़ा
सावरे से मिलने का सत्संग ही बहाना है ।
सारे दुःख दूर हुए, दिल बना दीवाना है ।
कहना कहना आन पड़ी मैं तेरे द्वार ।
मुझे चाकर समझ निहार ॥
ज़िंदगी मे हज़ारो का मेला जुड़ा
हंस जब जब उड़ा तब अकेला उड़ा
किशोरी कुछ ऐसा इंतजाम हो जाए।
जुबा पे राधा राधा राधा नाम हो जाए॥
जिनको जिनको सेठ बनाया वो क्या
उनसे तो प्यार है हमसे तकरार है ।
बोल कान्हा बोल गलत काम कैसे हो गया,
बिना शादी के तू राधे श्याम कैसे हो