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Srimad Bhagavatam Mahapuran [Bhagwat Katha] in English by Swami Mukundananda

Srimad Bhagavatam [Bhagwat Katha] - Part 1 by Swami Mukundananda

Srimad Bhagavatam [Bhagwat Katha] - Part 2 by Swami Mukundananda-How to get wisdom and detachment

Srimad Bhagavatam [Bhagwat Katha] - Part 3 by Swami Mukundananda- The Path of Righteousness

Srimad Bhagavatam [Bhagwat Katha] Part 4 - Swami Mukundananda - 24 Avatars of God

Srimad Bhagavatam [Bhagwat Katha] Part 5 by Swami Mukundananda - Story of Narada

Srimad Bhagavatam [Bhagwat Katha] Part 6 - Swami Mukundananda - Birth of Parikshit

Srimad Bhagavatam [Bhagwat Katha] Part 7 - Swami Mukundananda - Why did Kunti ask for hardship?

Srimad Bhagavatam [Bhagwat Katha] Part 8 - Swami Mukundananda - Bhishma's Lecture on Dharma

Srimad Bhagavatam [Bhagwat Katha] Part 9 - Swami Mukundananda - Where does Kaliyuga reside?

Srimad Bhagavatam [Bhagwat Katha] Part 10 - Swami Mukundananda - Means of welfare for a dying man

Contents of this list:

Srimad Bhagavatam [Bhagwat Katha] - Part 1 by Swami Mukundananda
Srimad Bhagavatam [Bhagwat Katha] - Part 2 by Swami Mukundananda-How to get wisdom and detachment
Srimad Bhagavatam [Bhagwat Katha] - Part 3 by Swami Mukundananda- The Path of Righteousness
Srimad Bhagavatam [Bhagwat Katha] Part 4 - Swami Mukundananda - 24 Avatars of God
Srimad Bhagavatam [Bhagwat Katha] Part 5 by Swami Mukundananda - Story of Narada
Srimad Bhagavatam [Bhagwat Katha] Part 6 - Swami Mukundananda - Birth of Parikshit
Srimad Bhagavatam [Bhagwat Katha] Part 7 - Swami Mukundananda - Why did Kunti ask for hardship?
Srimad Bhagavatam [Bhagwat Katha] Part 8 - Swami Mukundananda - Bhishma's Lecture on Dharma
Srimad Bhagavatam [Bhagwat Katha] Part 9 - Swami Mukundananda - Where does Kaliyuga reside?
Srimad Bhagavatam [Bhagwat Katha] Part 10 - Swami Mukundananda - Means of welfare for a dying man

Bhajan Lyrics View All

तेरी मंद मंद मुस्कनिया पे ,बलिहार
तेरी मंद मंद मुस्कनिया पे ,बलिहार
ਮੇਰੇ ਕਰਮਾਂ ਵੱਲ ਨਾ ਵੇਖਿਓ ਜੀ,
ਕਰਮਾਂ ਤੋਂ ਸ਼ਾਰਮਾਈ ਹੋਈ ਆਂ
यह मेरी अर्जी है,
मैं वैसी बन जाऊं जो तेरी मर्ज़ी है
ज़रा छलके ज़रा छलके वृदावन देखो
ज़रा हटके ज़रा हटके ज़माने से देखो
रंगीलो राधावल्लभ लाल, जै जै जै श्री
विहरत संग लाडली बाल, जै जै जै श्री
श्यामा तेरे चरणों की गर धूल जो मिल
सच कहता हूँ मेरी तकदीर बदल जाए॥
हम राम जी के, राम जी हमारे हैं
वो तो दशरथ राज दुलारे हैं
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से
गोविन्द नाम लेकर, फिर प्राण तन से
राधिका गोरी से ब्रिज की छोरी से ,
मैया करादे मेरो ब्याह,
श्याम बुलाये राधा नहीं आये,
आजा मेरी प्यारी राधे बागो में झूला
राधे मोरी बंसी कहा खो गयी,
कोई ना बताये और शाम हो गयी,
कोई कहे गोविंदा कोई गोपाला,
मैं तो कहूँ सांवरिया बांसुरी वाला ।
तुम रूठे रहो मोहन,
हम तुमको मन लेंगे
ये सारे खेल तुम्हारे है
जग कहता खेल नसीबों का
प्रभु कर कृपा पावँरी दीन्हि
सादर भारत शीश धरी लीन्ही
प्रीतम बोलो कब आओगे॥
बालम बोलो कब आओगे॥
मुझे चाहिए बस सहारा तुम्हारा,
के नैनों में गोविन्द नज़ारा तुम्हार
सारी दुनियां है दीवानी, राधा रानी आप
कौन है, जिस पर नहीं है, मेहरबानी आप की
ना मैं मीरा ना मैं राधा,
फिर भी श्याम को पाना है ।
सब के संकट दूर करेगी, यह बरसाने वाली,
बजाओ राधा नाम की ताली ।
तू कितनी अच्ची है, तू कितनी भोली है,
ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ ।
हम प्रेम नगर के बंजारिन है
जप ताप और साधन क्या जाने
मेरी करुणामयी सरकार, मिला दो ठाकुर से
कृपा करो भानु दुलारी, श्री राधे
सांवरिया है सेठ ,मेरी राधा जी सेठानी
यह तो सारी दुनिया जाने है
तेरे दर की भीख से है,
मेरा आज तक गुज़ारा
श्री राधा हमारी गोरी गोरी, के नवल
यो तो कालो नहीं है मतवारो, जगत उज्य
कोई कहे गोविंदा, कोई गोपाला।
मैं तो कहुँ सांवरिया बाँसुरिया वाला॥
मुँह फेर जिधर देखु मुझे तू ही नज़र आये
हम छोड़के दर तेरा अब और किधर जाये
दुनिया का बन कर देख लिया, श्यामा का बन
राधा नाम में कितनी शक्ति है, इस राह पर
जग में सुन्दर है दो नाम, चाहे कृष्ण
बोलो राम राम राम, बोलो श्याम श्याम