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Bhagavad Gita Satsang (Hindi) - Swami Mukundananda - Chapter 2

Bhagavad Gita Satsang - Swami Mukundananda, Part 1- Chapter 2

Bhagavad Gita Satsang - Swami Mukundananda, Part 2 - Chapter 2

Bhagavad Gita Satsang - Swami Mukundananda, Part 3 - Chapter 2

Bhagavad Gita Satsang - Swami Mukundananda, Part 4 - Chapter 2

Bhagavad Gita Satsang - Swami Mukundananda, Part 5 - Chapter 2

Bhagavad Gita Satsang - Swami Mukundananda, Part 6 - Chapter 2

Bhagavad Gita Satsang - Swami Mukundananda, Part 7 - Chapter 2

Bhagavad Gita Satsang - Swami Mukundananda, Part 8 - Chapter 2

Bhagavad Gita Satsang - Swami Mukundananda, Part 9 - Chapter 2

Bhagavad Gita Satsang - Swami Mukundananda, Part 10 - Chapter 2

Bhagavad Gita Satsang - Swami Mukundananda, Part 11 - Chapter 2

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Bhagavad Gita Satsang - Swami Mukundananda, Part 2 - Chapter 2
Bhagavad Gita Satsang - Swami Mukundananda, Part 3 - Chapter 2
Bhagavad Gita Satsang - Swami Mukundananda, Part 4 - Chapter 2
Bhagavad Gita Satsang - Swami Mukundananda, Part 5 - Chapter 2
Bhagavad Gita Satsang - Swami Mukundananda, Part 6 - Chapter 2
Bhagavad Gita Satsang - Swami Mukundananda, Part 7 - Chapter 2
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राधे मोरी बंसी कहा खो गयी,
कोई ना बताये और शाम हो गयी,
राधे राधे बोल, श्याम भागे चले आयंगे।
एक बार आ गए तो कबू नहीं जायेंगे ॥
कोई कहे गोविंदा, कोई गोपाला।
मैं तो कहुँ सांवरिया बाँसुरिया वाला॥
ये तो बतादो बरसानेवाली,मैं कैसे
तेरी कृपा से है यह जीवन है मेरा,कैसे
तेरे बगैर सांवरिया जिया नही जाये
तुम आके बांह पकड लो तो कोई बात बने‌॥
करदो करदो बेडा पार, राधे अलबेली सरकार।
राधे अलबेली सरकार, राधे अलबेली
तेरे दर पे आके ज़िन्दगी मेरी
यह तो तेरी नज़र का कमाल है,
हो मेरी लाडो का नाम श्री राधा
श्री राधा श्री राधा, श्री राधा श्री
कैसे जीऊं मैं राधा रानी तेरे बिना
मेरा मन ही न लगे श्यामा तेरे बिना
वृन्दावन के बांके बिहारी,
हमसे पर्दा करो ना मुरारी ।
फूलों में सज रहे हैं, श्री वृन्दावन
और संग में सज रही है वृषभानु की
किशोरी कुछ ऐसा इंतजाम हो जाए।
जुबा पे राधा राधा राधा नाम हो जाए॥
एक दिन वो भोले भंडारी बन कर के ब्रिज
पारवती भी मना कर ना माने त्रिपुरारी,
मीठे रस से भरी रे, राधा रानी लागे,
मने कारो कारो जमुनाजी रो पानी लागे
तीनो लोकन से न्यारी राधा रानी हमारी।
राधा रानी हमारी, राधा रानी हमारी॥
ਮੇਰੇ ਕਰਮਾਂ ਵੱਲ ਨਾ ਵੇਖਿਓ ਜੀ,
ਕਰਮਾਂ ਤੋਂ ਸ਼ਾਰਮਾਈ ਹੋਈ ਆਂ
वास देदो किशोरी जी बरसाना,
छोडो छोडो जी छोडो जी तरसाना ।
ज़रा छलके ज़रा छलके वृदावन देखो
ज़रा हटके ज़रा हटके ज़माने से देखो
तुम रूठे रहो मोहन,
हम तुमको मन लेंगे
हे राम, हे राम, हे राम, हे राम
जग में साचे तेरो नाम । हे राम...
आँखों को इंतज़ार है सरकार आपका
ना जाने होगा कब हमें दीदार आपका
वृदावन जाने को जी चाहता है,
राधे राधे गाने को जी चाहता है,
मोहे आन मिलो श्याम, बहुत दिन बीत गए।
बहुत दिन बीत गए, बहुत युग बीत गए ॥
कैसे जिऊ मैं राधा रानी तेरे बिना
मेरा मन ही ना लागे तुम्हारे बिना
हर साँस में हो सुमिरन तेरा,
यूँ बीत जाये जीवन मेरा
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से
गोविन्द नाम लेकर, फिर प्राण तन से
कहना कहना आन पड़ी मैं तेरे द्वार ।
मुझे चाकर समझ निहार ॥
हम राम जी के, राम जी हमारे हैं
वो तो दशरथ राज दुलारे हैं
हम हाथ उठाकर कह देंगे हम हो गये राधा
राधा राधा राधा राधा
तू कितनी अच्ची है, तू कितनी भोली है,
ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ ।