Share this page on following platforms.

Home Gurus Jaya Kishori ji

Bhagat ke bas mei hai bhagwan

Bhagat ke bas mei hai bhagwan (Original SCI BHAJAN) by Jai Shankar Chaudhury

भक्त के वश में है भगवान | Bhagat Ke Vash Me Hai Bhagwan | Manoj Sharma

Bhagat ke Vash mei hai bhagwan by Jaya Kishori 2015 (FULL VIDEO)

Contents of this list:

Bhajan Lyrics View All

सावरे से मिलने का सत्संग ही बहाना है ।
सारे दुःख दूर हुए, दिल बना दीवाना है ।
मेरा यार यशुदा कुंवर हो चूका है
वो दिल हो चूका है जिगर हो चूका है
मुझे चाहिए बस सहारा तुम्हारा,
के नैनों में गोविन्द नज़ारा तुम्हार
प्रीतम बोलो कब आओगे॥
बालम बोलो कब आओगे॥
ना मैं मीरा ना मैं राधा,
फिर भी श्याम को पाना है ।
करदो करदो बेडा पार, राधे अलबेली सरकार।
राधे अलबेली सरकार, राधे अलबेली
तू कितनी अच्ची है, तू कितनी भोली है,
ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ ।
श्याम बुलाये राधा नहीं आये,
आजा मेरी प्यारी राधे बागो में झूला
सब के संकट दूर करेगी, यह बरसाने वाली,
बजाओ राधा नाम की ताली ।
राधे राधे बोल, राधे राधे बोल,
बरसाने मे दोल, के मुख से राधे राधे बोल,
जय राधे राधे, राधे राधे
जय राधे राधे, राधे राधे
मन चल वृंदावन धाम, रटेंगे राधे राधे
मिलेंगे कुंज बिहारी, ओढ़ के कांबल
आँखों को इंतज़ार है सरकार आपका
ना जाने होगा कब हमें दीदार आपका
Ye Saare Khel Tumhare Hai Jag
Kahta Khel Naseebo Ka
किशोरी कुछ ऐसा इंतजाम हो जाए।
जुबा पे राधा राधा राधा नाम हो जाए॥
हम राम जी के, राम जी हमारे हैं
वो तो दशरथ राज दुलारे हैं
कान्हा की दीवानी बन जाउंगी,
दीवानी बन जाउंगी मस्तानी बन जाउंगी,
तेरे दर पे आके ज़िन्दगी मेरी
यह तो तेरी नज़र का कमाल है,
मुँह फेर जिधर देखु मुझे तू ही नज़र आये
हम छोड़के दर तेरा अब और किधर जाये
वास देदो किशोरी जी बरसाना,
छोडो छोडो जी छोडो जी तरसाना ।
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से
गोविन्द नाम लेकर, फिर प्राण तन से
फूलों में सज रहे हैं, श्री वृन्दावन
और संग में सज रही है वृषभानु की
बहुत बड़ा दरबार तेरो बहुत बड़ा दरबार,
चाकर रखलो राधा रानी तेरा बहुत बड़ा
तेरी मुरली की धुन सुनने मैं बरसाने से
मैं बरसाने से आयी हूँ, मैं वृषभानु की
जग में सुन्दर है दो नाम, चाहे कृष्ण
बोलो राम राम राम, बोलो श्याम श्याम
इक तारा वाजदा जी हर दम गोविन्द
जग ताने देंदा ए, तै मैनु कोई फरक नहीं
मोहे आन मिलो श्याम, बहुत दिन बीत गए।
बहुत दिन बीत गए, बहुत युग बीत गए ॥
जिनको जिनको सेठ बनाया वो क्या
उनसे तो प्यार है हमसे तकरार है ।
ज़िंदगी मे हज़ारो का मेला जुड़ा
हंस जब जब उड़ा तब अकेला उड़ा
कोई पकड़ के मेरा हाथ रे,
मोहे वृन्दावन पहुंच देओ ।