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Shreemad Bhagwat Katha By Shri Abhishekji Goswami Maharaj in March,2015 in Mumbai

Shreemad Bhagwat Katha - Shri Abhishekji Goswami Maharaj - Juhu, Mumbai (Day 1)

Shreemad Bhagwat Katha - Shri Abhishekji Goswami Maharaj - Juhu, Mumbai (Day 2)

Shreemad Bhagwat Katha - Shri Abhishekji Goswami Maharaj - Juhu, Mumbai (Day 3)

Shreemad Bhagwat Katha - Shri Abhishekji Goswami Maharaj - Juhu, Mumbai (Day 4)

Shreemad Bhagwat Katha - Shri Abhishekji Goswami Maharaj - Juhu, Mumbai (Day 5)

Shreemad Bhagwat Katha - Shri Abhishekji Goswami Maharaj - Juhu, Mumbai (Day 6)

Shreemad Bhagwat Katha - Shri Abhishekji Goswami Maharaj - Juhu, Mumbai (Day 7)

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जग में सुन्दर है दो नाम, चाहे कृष्ण
बोलो राम राम राम, बोलो श्याम श्याम
अच्युतम केशवं राम नारायणं,
कृष्ण दमोधराम वासुदेवं हरिं,
दिल की हर धड़कन से तेरा नाम निकलता है
तेरे दर्शन को मोहन तेरा दास तरसता है
राधे तु कितनी प्यारी है ॥
तेरे संग में बांके बिहारी कृष्ण
किशोरी कुछ ऐसा इंतजाम हो जाए।
जुबा पे राधा राधा राधा नाम हो जाए॥
तुम रूठे रहो मोहन,
हम तुमको मन लेंगे
हे राम, हे राम, हे राम, हे राम
जग में साचे तेरो नाम । हे राम...
राधे राधे बोल, राधे राधे बोल,
बरसाने मे दोल, के मुख से राधे राधे बोल,
सावरे से मिलने का सत्संग ही बहाना है ।
सारे दुःख दूर हुए, दिल बना दीवाना है ।
दाता एक राम, भिखारी सारी दुनिया ।
राम एक देवता, पुजारी सारी दुनिया ॥
हो मेरी लाडो का नाम श्री राधा
श्री राधा श्री राधा, श्री राधा श्री
सब के संकट दूर करेगी, यह बरसाने वाली,
बजाओ राधा नाम की ताली ।
प्रीतम बोलो कब आओगे॥
बालम बोलो कब आओगे॥
राधा ढूंढ रही किसी ने मेरा श्याम देखा
श्याम देखा घनश्याम देखा
वृन्दावन के बांके बिहारी,
हमसे पर्दा करो ना मुरारी ।
मेरी करुणामयी सरकार पता नहीं क्या दे
क्या दे दे भई, क्या दे दे
मुझे रास आ गया है,
तेरे दर पे सर झुकाना
सांवरिया है सेठ ,मेरी राधा जी सेठानी
यह तो सारी दुनिया जाने है
रंगीलो राधावल्लभ लाल, जै जै जै श्री
विहरत संग लाडली बाल, जै जै जै श्री
राधा नाम की लगाई फुलवारी, के पत्ता
के पत्ता पत्ता श्याम बोलता, के पत्ता
बहुत बड़ा दरबार तेरो बहुत बड़ा दरबार,
चाकर रखलो राधा रानी तेरा बहुत बड़ा
बृज के नन्द लाला राधा के सांवरिया
सभी दुख: दूर हुए जब तेरा नाम लिया
श्यामा प्यारी मेरे साथ हैं,
फिर डरने की क्या बात है
कोई पकड़ के मेरा हाथ रे,
मोहे वृन्दावन पहुंच देओ ।
अपनी वाणी में अमृत घोल
अपनी वाणी में अमृत घोल
ज़रा छलके ज़रा छलके वृदावन देखो
ज़रा हटके ज़रा हटके ज़माने से देखो
कहना कहना आन पड़ी मैं तेरे द्वार ।
मुझे चाकर समझ निहार ॥
मुझे रास आ गया है, तेरे दर पे सर झुकाना
तुझे मिल गया पुजारी, मुझे मिल गया
तू कितनी अच्ची है, तू कितनी भोली है,
ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ ।
मेरी करुणामयी सरकार, मिला दो ठाकुर से
कृपा करो भानु दुलारी, श्री राधे