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Pujya Shri Rajendra Das Ji

Maluk Pithadhishvar Swami Shri Rajendra Das Ji Maharaj - Gopi Gitam

Swami Shri Rajendra Das Devacharya Ji Maharaj sings Shri Yugal Mahamantra Kirtan on NIMBARK JAYANTI

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Maluk Pithadhishvar Swami Shri Rajendra Das Ji Maharaj - Gopi Gitam
Swami Shri Rajendra Das Devacharya Ji Maharaj sings Shri Yugal Mahamantra Kirtan on NIMBARK JAYANTI
maluk peeth rajendra das ji mahraj vinay patrika by umaseries

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मेरा यार यशुदा कुंवर हो चूका है
वो दिल हो चूका है जिगर हो चूका है
एक दिन वो भोले भंडारी बन कर के ब्रिज
पारवती भी मना कर ना माने त्रिपुरारी,
राधा ढूंढ रही किसी ने मेरा श्याम देखा
श्याम देखा घनश्याम देखा
ज़री की पगड़ी बाँधे, सुंदर आँखों वाला,
कितना सुंदर लागे बिहारी कितना लागे
ये सारे खेल तुम्हारे है
जग कहता खेल नसीबों का
राधा कट दी है गलिआं दे मोड़ आज मेरे
श्याम ने आना घनश्याम ने आना
हर साँस में हो सुमिरन तेरा,
यूँ बीत जाये जीवन मेरा
श्यामा तेरे चरणों की गर धूल जो मिल
सच कहता हूँ मेरी तकदीर बदल जाए॥
हर पल तेरे साथ मैं रहता हूँ,
डरने की क्या बात? जब मैं बैठा हूँ
मेरी करुणामयी सरकार, मिला दो ठाकुर से
कृपा करो भानु दुलारी, श्री राधे
मुँह फेर जिधर देखु मुझे तू ही नज़र आये
हम छोड़के दर तेरा अब और किधर जाये
इक तारा वाजदा जी हर दम गोविन्द
जग ताने देंदा ए, तै मैनु कोई फरक नहीं
मुझे चाहिए बस सहारा तुम्हारा,
के नैनों में गोविन्द नज़ारा तुम्हार
यह मेरी अर्जी है,
मैं वैसी बन जाऊं जो तेरी मर्ज़ी है
हम राम जी के, राम जी हमारे हैं
वो तो दशरथ राज दुलारे हैं
सारी दुनियां है दीवानी, राधा रानी आप
कौन है, जिस पर नहीं है, मेहरबानी आप की
सांवरिया है सेठ ,मेरी राधा जी सेठानी
यह तो सारी दुनिया जाने है
तेरे बगैर सांवरिया जिया नही जाये
तुम आके बांह पकड लो तो कोई बात बने‌॥
मेरा आपकी कृपा से,
सब काम हो रहा है
कैसे जिऊ मैं राधा रानी तेरे बिना
मेरा मन ही ना लागे तुम्हारे बिना
नटवर नागर नंदा, भजो रे मन गोविंदा
शयाम सुंदर मुख चंदा, भजो रे मन
तीनो लोकन से न्यारी राधा रानी हमारी।
राधा रानी हमारी, राधा रानी हमारी॥
मुझे रास आ गया है,
तेरे दर पे सर झुकाना
तेरे दर की भीख से है,
मेरा आज तक गुज़ारा
जिनको जिनको सेठ बनाया वो क्या
उनसे तो प्यार है हमसे तकरार है ।
सब के संकट दूर करेगी, यह बरसाने वाली,
बजाओ राधा नाम की ताली ।
कहना कहना आन पड़ी मैं तेरे द्वार ।
मुझे चाकर समझ निहार ॥
बृज के नन्द लाला राधा के सांवरिया
सभी दुख: दूर हुए जब तेरा नाम लिया
फूलों में सज रहे हैं, श्री वृन्दावन
और संग में सज रही है वृषभानु की
किशोरी कुछ ऐसा इंतजाम हो जाए।
जुबा पे राधा राधा राधा नाम हो जाए॥