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Geeta Pravachan By Shri Pundrik Goswamiji Maharaj in March 2014 at Delhi

Geeta Pravachan - Shri Pundrik Goswamiji Maharaj - Delhi (Day 1)

Geeta Pravachan - Shri Pundrik Goswamiji Maharaj - Delhi (Day 2)

Geeta Pravachan - Shri Pundrik Goswamiji Maharaj - Delhi (Day 3)

Geeta Pravachan - Shri Pundrik Goswamiji Maharaj - Delhi (Day 4)

Geeta Pravachan - Shri Pundrik Goswamiji Maharaj - Delhi (Day 5)

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मेरे जीवन की जुड़ गयी डोर, किशोरी तेरे
किशोरी तेरे चरणन में, महारानी तेरे
जग में सुन्दर है दो नाम, चाहे कृष्ण
बोलो राम राम राम, बोलो श्याम श्याम
तुम रूठे रहो मोहन,
हम तुमको मन लेंगे
प्रभु कर कृपा पावँरी दीन्हि
सादर भारत शीश धरी लीन्ही
अपनी वाणी में अमृत घोल
अपनी वाणी में अमृत घोल
किशोरी कुछ ऐसा इंतजाम हो जाए।
जुबा पे राधा राधा राधा नाम हो जाए॥
हे राम, हे राम, हे राम, हे राम
जग में साचे तेरो नाम । हे राम...
मीठे रस से भरी रे, राधा रानी लागे,
मने कारो कारो जमुनाजी रो पानी लागे
तेरे दर पे आके ज़िन्दगी मेरी
यह तो तेरी नज़र का कमाल है,
एक दिन वो भोले भंडारी बन कर के ब्रिज
पारवती भी मना कर ना माने त्रिपुरारी,
जिनको जिनको सेठ बनाया वो क्या
उनसे तो प्यार है हमसे तकरार है ।
बोल कान्हा बोल गलत काम कैसे हो गया,
बिना शादी के तू राधे श्याम कैसे हो
मुझे रास आ गया है, तेरे दर पे सर झुकाना
तुझे मिल गया पुजारी, मुझे मिल गया
श्यामा प्यारी मेरे साथ हैं,
फिर डरने की क्या बात है
मुझे चढ़ गया राधा रंग रंग, मुझे चढ़
श्री राधा नाम का रंग रंग, श्री राधा
सारी दुनियां है दीवानी, राधा रानी आप
कौन है, जिस पर नहीं है, मेहरबानी आप की
सांवरियो है सेठ, म्हारी राधा जी
यह तो जाने दुनिया सारी है
यह मेरी अर्जी है,
मैं वैसी बन जाऊं जो तेरी मर्ज़ी है
मोहे आन मिलो श्याम, बहुत दिन बीत गए।
बहुत दिन बीत गए, बहुत युग बीत गए ॥
एक कोर कृपा की करदो स्वामिनी श्री
दासी की झोली भर दो लाडली श्री राधे॥
कहना कहना आन पड़ी मैं तेरे द्वार ।
मुझे चाकर समझ निहार ॥
जय राधे राधे, राधे राधे
जय राधे राधे, राधे राधे
कोई कहे गोविंदा कोई गोपाला,
मैं तो कहूँ सांवरिया बांसुरी वाला ।
ना मैं मीरा ना मैं राधा,
फिर भी श्याम को पाना है ।
सावरे से मिलने का सत्संग ही बहाना है ।
सारे दुःख दूर हुए, दिल बना दीवाना है ।
मुँह फेर जिधर देखु मुझे तू ही नज़र आये
हम छोड़के दर तेरा अब और किधर जाये
मन चल वृंदावन धाम, रटेंगे राधे राधे
मिलेंगे कुंज बिहारी, ओढ़ के कांबल
फूलों में सज रहे हैं, श्री वृन्दावन
और संग में सज रही है वृषभानु की
ज़री की पगड़ी बाँधे, सुंदर आँखों वाला,
कितना सुंदर लागे बिहारी कितना लागे
ਮੇਰੇ ਕਰਮਾਂ ਵੱਲ ਨਾ ਵੇਖਿਓ ਜੀ,
ਕਰਮਾਂ ਤੋਂ ਸ਼ਾਰਮਾਈ ਹੋਈ ਆਂ