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Gita lectured by Gyananand Ji

LIVE - Gita Pravachan by Shri Gyananand Ji Maharaj - 16 May || Day 1

LIVE - Gita Pravachan by Shri Gyananand Ji Maharaj - 17 May || Day 2

LIVE - Gita Pravachan by Shri Gyananand Ji Maharaj - May || Day 3

LIVE - Gita Pravachan by Shri Gyananand Ji Maharaj - 19 May || Day 4

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LIVE - Gita Pravachan by Shri Gyananand Ji Maharaj - 16 May || Day 1
LIVE - Gita Pravachan by Shri Gyananand Ji Maharaj - 17 May || Day 2
LIVE - Gita Pravachan by Shri Gyananand Ji Maharaj - May || Day 3
LIVE - Gita Pravachan by Shri Gyananand Ji Maharaj - 19 May || Day 4

Bhajan Lyrics View All

यह मेरी अर्जी है,
मैं वैसी बन जाऊं जो तेरी मर्ज़ी है
एक दिन वो भोले भंडारी बन कर के ब्रिज
पारवती भी मना कर ना माने त्रिपुरारी,
फूलों में सज रहे हैं, श्री वृन्दावन
और संग में सज रही है वृषभानु की
प्रीतम बोलो कब आओगे॥
बालम बोलो कब आओगे॥
हे राम, हे राम, हे राम, हे राम
जग में साचे तेरो नाम । हे राम...
सारी दुनियां है दीवानी, राधा रानी आप
कौन है, जिस पर नहीं है, मेहरबानी आप की
मुझे रास आ गया है,
तेरे दर पे सर झुकाना
ना मैं मीरा ना मैं राधा,
फिर भी श्याम को पाना है ।
मुझे रास आ गया है, तेरे दर पे सर झुकाना
तुझे मिल गया पुजारी, मुझे मिल गया
नी मैं दूध काहे नाल रिडका चाटी चो
लै गया नन्द किशोर लै गया,
वृदावन जाने को जी चाहता है,
राधे राधे गाने को जी चाहता है,
बोल कान्हा बोल गलत काम कैसे हो गया,
बिना शादी के तू राधे श्याम कैसे हो
तमन्ना यही है के उड के बरसाने आयुं मैं
आके बरसाने में तेरे दिल की हसरतो को
तीनो लोकन से न्यारी राधा रानी हमारी।
राधा रानी हमारी, राधा रानी हमारी॥
तुम रूठे रहो मोहन,
हम तुमको मन लेंगे
बहुत बड़ा दरबार तेरो बहुत बड़ा दरबार,
चाकर रखलो राधा रानी तेरा बहुत बड़ा
दुनिया का बन कर देख लिया, श्यामा का बन
राधा नाम में कितनी शक्ति है, इस राह पर
हम प्रेम नगर के बंजारिन है
जप ताप और साधन क्या जाने
राधिका गोरी से ब्रिज की छोरी से ,
मैया करादे मेरो ब्याह,
अच्युतम केशवं राम नारायणं,
कृष्ण दमोधराम वासुदेवं हरिं,
दाता एक राम, भिखारी सारी दुनिया ।
राम एक देवता, पुजारी सारी दुनिया ॥
मेरी करुणामयी सरकार, मिला दो ठाकुर से
कृपा करो भानु दुलारी, श्री राधे
राधा नाम की लगाई फुलवारी, के पत्ता
के पत्ता पत्ता श्याम बोलता, के पत्ता
तू कितनी अच्ची है, तू कितनी भोली है,
ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ ।
हम राम जी के, राम जी हमारे हैं
वो तो दशरथ राज दुलारे हैं
प्रभु कर कृपा पावँरी दीन्हि
सादर भारत शीश धरी लीन्ही
नटवर नागर नंदा, भजो रे मन गोविंदा
शयाम सुंदर मुख चंदा, भजो रे मन
सावरे से मिलने का सत्संग ही बहाना है ।
सारे दुःख दूर हुए, दिल बना दीवाना है ।
दुनिया से मैं हारा तो आया तेरे द्वार,
यहाँ से गर जो हरा कहाँ जाऊँगा सरकार
जीवन खतम हुआ तो जीने का ढंग आया
जब शमा बुझ गयी तो महफ़िल में रंग आया