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Shrimad Bhagwat Katha By Avdheshanand Giriji Maharaj in September 2014 at Bhiwadi,Alwar, Rajasthan

Bhiwadi-Alwar, Rajasthan (25 September 2014) | Shrimad Bhagwat Katha | Avdheshanand Giriji Maharaj

Bhiwadi-Alwar, Rajasthan (26 September 2014) | Shrimad Bhagwat Katha | Avdheshanand Giriji Maharaj

Bhiwadi-Alwar, Rajasthan (27 September 2014) | Shrimad Bhagwat Katha | Avdheshanand Giriji Maharaj

Bhiwadi-Alwar, Rajasthan (28 September 2014) | Shrimad Bhagwat Katha | Avdheshanand Giriji Maharaj

Bhiwadi-Alwar, Rajasthan (29 September 2014) | Shrimad Bhagwat Katha | Avdheshanand Giriji Maharaj

Bhiwadi-Alwar, Rajasthan (30 September 2014) | Shrimad Bhagwat Katha | Avdheshanand Giriji Maharaj

Bhiwadi-Alwar, Rajasthan (1 October 2014) | Shrimad Bhagwat Katha | Avdheshanand Giriji Maharaj

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Bhajan Lyrics View All

हम हाथ उठाकर कह देंगे हम हो गये राधा
राधा राधा राधा राधा
एक कोर कृपा की करदो स्वामिनी श्री
दासी की झोली भर दो लाडली श्री राधे॥
जय राधे राधे, राधे राधे
जय राधे राधे, राधे राधे
मीठे रस से भरी रे, राधा रानी लागे,
मने कारो कारो जमुनाजी रो पानी लागे
श्यामा तेरे चरणों की गर धूल जो मिल
सच कहता हूँ मेरी तकदीर बदल जाए॥
जिनको जिनको सेठ बनाया वो क्या
उनसे तो प्यार है हमसे तकरार है ।
तीनो लोकन से न्यारी राधा रानी हमारी।
राधा रानी हमारी, राधा रानी हमारी॥
तू राधे राधे गा ,
तोहे मिल जाएं सांवरियामिल जाएं
मुझे रास आ गया है,
तेरे दर पे सर झुकाना
वृंदावन में हुकुम चले बरसाने वाली का,
कान्हा भी दीवाना है श्री श्यामा
हर पल तेरे साथ मैं रहता हूँ,
डरने की क्या बात? जब मैं बैठा हूँ
फूलों में सज रहे हैं, श्री वृन्दावन
और संग में सज रही है वृषभानु की
राधे तु कितनी प्यारी है ॥
तेरे संग में बांके बिहारी कृष्ण
मेरी करुणामयी सरकार, मिला दो ठाकुर से
कृपा करो भानु दुलारी, श्री राधे
यह मेरी अर्जी है,
मैं वैसी बन जाऊं जो तेरी मर्ज़ी है
कोई पकड़ के मेरा हाथ रे,
मोहे वृन्दावन पहुंच देओ ।
ये सारे खेल तुम्हारे है
जग कहता खेल नसीबों का
सांवरियो है सेठ, म्हारी राधा जी
यह तो जाने दुनिया सारी है
तेरे बगैर सांवरिया जिया नही जाये
तुम आके बांह पकड लो तो कोई बात बने‌॥
सांवरिया है सेठ ,मेरी राधा जी सेठानी
यह तो सारी दुनिया जाने है
हम प्रेम नगर के बंजारिन है
जप ताप और साधन क्या जाने
किशोरी कुछ ऐसा इंतजाम हो जाए।
जुबा पे राधा राधा राधा नाम हो जाए॥
हर साँस में हो सुमिरन तेरा,
यूँ बीत जाये जीवन मेरा
ना मैं मीरा ना मैं राधा,
फिर भी श्याम को पाना है ।
अपनी वाणी में अमृत घोल
अपनी वाणी में अमृत घोल
राधा कट दी है गलिआं दे मोड़ आज मेरे
श्याम ने आना घनश्याम ने आना
मोहे आन मिलो श्याम, बहुत दिन बीत गए।
बहुत दिन बीत गए, बहुत युग बीत गए ॥
तुम रूठे रहो मोहन,
हम तुमको मन लेंगे
कैसे जीऊं मैं राधा रानी तेरे बिना
मेरा मन ही न लगे श्यामा तेरे बिना
तेरी मंद मंद मुस्कनिया पे ,बलिहार
तेरी मंद मंद मुस्कनिया पे ,बलिहार