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श्रीमद्भागवत कथा - अवधेशानंद गिरि जी ॥ उज्जैन (मध्य प्रदेश)

LIVE - Shrimad Bhagwat Katha by Shri Avdheshanand Giri Ji - 12 May 2016 || Day 1

LIVE - Shrimad Bhagwat Katha by Shri Avdheshanand Giri Ji - 13 May 2016 || Day 2

LIVE - Shrimad Bhagwat Katha by Shri Avdheshanand Giri Ji - 14 May 2016 || Day 3

LIVE - Shrimad Bhagwat Katha by Shri Avdheshanand Giri Ji - 16 May 2016 || Day 5

LIVE - Shrimad Bhagwat Katha by Shri Avdheshanand Giri Ji - 17 May 2016 || Day 6

LIVE - Shrimad Bhagwat Katha by Shri Avdheshanand Giri Ji - May 2016 || Day 7

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LIVE - Shrimad Bhagwat Katha by Shri Avdheshanand Giri Ji - 12 May 2016 || Day 1
LIVE - Shrimad Bhagwat Katha by Shri Avdheshanand Giri Ji - 13 May 2016 || Day 2
LIVE - Shrimad Bhagwat Katha by Shri Avdheshanand Giri Ji - 14 May 2016 || Day 3
LIVE - Shrimad Bhagwat Katha by Shri Avdheshanand Giri Ji - 16 May 2016 || Day 5
LIVE - Shrimad Bhagwat Katha by Shri Avdheshanand Giri Ji - 17 May 2016 || Day 6
LIVE - Shrimad Bhagwat Katha by Shri Avdheshanand Giri Ji - May 2016 || Day 7

Bhajan Lyrics View All

आँखों को इंतज़ार है सरकार आपका
ना जाने होगा कब हमें दीदार आपका
बांके बिहारी की देख छटा,
मेरो मन है गयो लटा पटा।
हम हाथ उठाकर कह देंगे हम हो गये राधा
राधा राधा राधा राधा
वृंदावन में हुकुम चले बरसाने वाली का,
कान्हा भी दीवाना है श्री श्यामा
मेरे जीवन की जुड़ गयी डोर, किशोरी तेरे
किशोरी तेरे चरणन में, महारानी तेरे
ना मैं मीरा ना मैं राधा,
फिर भी श्याम को पाना है ।
राधा कट दी है गलिआं दे मोड़ आज मेरे
श्याम ने आना घनश्याम ने आना
अपने दिल का दरवाजा हम खोल के सोते है
सपने में आ जाना मईया,ये बोल के सोते है
दिल की हर धड़कन से तेरा नाम निकलता है
तेरे दर्शन को मोहन तेरा दास तरसता है
मुझे चढ़ गया राधा रंग रंग, मुझे चढ़
श्री राधा नाम का रंग रंग, श्री राधा
यशोमती मैया से बोले नंदलाला,
राधा क्यूँ गोरी, मैं क्यूँ काला
कोई पकड़ के मेरा हाथ रे,
मोहे वृन्दावन पहुंच देओ ।
ज़रा छलके ज़रा छलके वृदावन देखो
ज़रा हटके ज़रा हटके ज़माने से देखो
हम प्रेम दीवानी हैं, वो प्रेम दीवाना।
ऐ उधो हमे ज्ञान की पोथी ना सुनाना॥
ज़िंदगी मे हज़ारो का मेला जुड़ा
हंस जब जब उड़ा तब अकेला उड़ा
कहना कहना आन पड़ी मैं तेरे द्वार ।
मुझे चाकर समझ निहार ॥
श्री राधा हमारी गोरी गोरी, के नवल
यो तो कालो नहीं है मतवारो, जगत उज्य
ज़री की पगड़ी बाँधे, सुंदर आँखों वाला,
कितना सुंदर लागे बिहारी कितना लागे
राधे राधे बोल, राधे राधे बोल,
बरसाने मे दोल, के मुख से राधे राधे बोल,
हर पल तेरे साथ मैं रहता हूँ,
डरने की क्या बात? जब मैं बैठा हूँ
प्रीतम बोलो कब आओगे॥
बालम बोलो कब आओगे॥
राधे राधे बोल, श्याम भागे चले आयंगे।
एक बार आ गए तो कबू नहीं जायेंगे ॥
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से
गोविन्द नाम लेकर, फिर प्राण तन से
राधे तु कितनी प्यारी है ॥
तेरे संग में बांके बिहारी कृष्ण
एक दिन वो भोले भंडारी बन कर के ब्रिज
पारवती भी मना कर ना माने त्रिपुरारी,
मेरा आपकी कृपा से,
सब काम हो रहा है
हम प्रेम नगर के बंजारिन है
जप ताप और साधन क्या जाने
ये सारे खेल तुम्हारे है
जग कहता खेल नसीबों का
जिनको जिनको सेठ बनाया वो क्या
उनसे तो प्यार है हमसे तकरार है ।
रंगीलो राधावल्लभ लाल, जै जै जै श्री
विहरत संग लाडली बाल, जै जै जै श्री