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Avdheshanand Giriji Bhagwatkatha Ujjain (MP) 2016

Bhagwatkatha by Avdheshanand Giriji Maharaj from Kumbh Mahaparv 2016 Ujjain part 3

Bhagwatkatha by Avdheshanand Giriji Maharaj from Kumbh Mahaparv 2016 Ujjain part 2

Bhagwatkatha by Avdheshanand Giriji Maharaj from Kumbh Mahaparv 2016 Ujjain part 1

Bhagwatkatha by Avdheshanand Giriji Maharaj from Kumbh Mahaparv 2016 Ujjain part 4

Bhagwatkatha by Avdheshanand Giriji Maharaj from Kumbh Mahaparv 2016 Ujjain part 5

Bhagwatkatha by Avdheshanand Giriji Maharaj from Kumbh Mahaparv 2016 Ujjain part 6

Bhagwatkatha by Avdheshanand Giriji Maharaj from Kumbh Mahaparv 2016 Ujjain part 7

Bhagwatkatha by Avdheshanand Giriji Maharaj from Kumbh Mahaparv 2016 Ujjain part 8

Bhagwatkatha by Avdheshanand Giriji Maharaj from Kumbh Mahaparv 2016 Ujjain part 9

Bhagwatkatha by Avdheshanand Giriji Maharaj from Kumbh Mahaparv 2016 Ujjain part 10

Bhagwatkatha by Avdheshanand Giriji Maharaj from Kumbh Mahaparv 2016 Ujjain part 11

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Bhagwatkatha by Avdheshanand Giriji Maharaj from Kumbh Mahaparv 2016 Ujjain part 3
Bhagwatkatha by Avdheshanand Giriji Maharaj from Kumbh Mahaparv 2016 Ujjain part 2
Bhagwatkatha by Avdheshanand Giriji Maharaj from Kumbh Mahaparv 2016 Ujjain part 1
Bhagwatkatha by Avdheshanand Giriji Maharaj from Kumbh Mahaparv 2016 Ujjain part 4
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Bhagwatkatha by Avdheshanand Giriji Maharaj from Kumbh Mahaparv 2016 Ujjain part 6
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Bhagwatkatha by Avdheshanand Giriji Maharaj from Kumbh Mahaparv 2016 Ujjain part 10
Bhagwatkatha by Avdheshanand Giriji Maharaj from Kumbh Mahaparv 2016 Ujjain part 11

Bhajan Lyrics View All

वृदावन जाने को जी चाहता है,
राधे राधे गाने को जी चाहता है,
इक तारा वाजदा जी हर दम गोविन्द
जग ताने देंदा ए, तै मैनु कोई फरक नहीं
कहना कहना आन पड़ी मैं तेरे द्वार ।
मुझे चाकर समझ निहार ॥
तेरी मुरली की धुन सुनने मैं बरसाने से
मैं बरसाने से आयी हूँ, मैं वृषभानु की
कैसे जीऊं मैं राधा रानी तेरे बिना
मेरा मन ही न लगे श्यामा तेरे बिना
बृज के नन्द लाला राधा के सांवरिया
सभी दुख: दूर हुए जब तेरा नाम लिया
दिल लूटके ले गया नी सहेलियो मेरा
मैं तक्दी रह गयी नी सहेलियो लगदा
ज़िंदगी मे हज़ारो का मेला जुड़ा
हंस जब जब उड़ा तब अकेला उड़ा
मोहे आन मिलो श्याम, बहुत दिन बीत गए।
बहुत दिन बीत गए, बहुत युग बीत गए ॥
मुँह फेर जिधर देखु मुझे तू ही नज़र आये
हम छोड़के दर तेरा अब और किधर जाये
जीवन खतम हुआ तो जीने का ढंग आया
जब शमा बुझ गयी तो महफ़िल में रंग आया
राधे मोरी बंसी कहा खो गयी,
कोई ना बताये और शाम हो गयी,
मुझे चाहिए बस सहारा तुम्हारा,
के नैनों में गोविन्द नज़ारा तुम्हार
तेरे बगैर सांवरिया जिया नही जाये
तुम आके बांह पकड लो तो कोई बात बने‌॥
अपनी वाणी में अमृत घोल
अपनी वाणी में अमृत घोल
राधा ढूंढ रही किसी ने मेरा श्याम देखा
श्याम देखा घनश्याम देखा
मेरी रसना से राधा राधा नाम निकले,
हर घडी हर पल, हर घडी हर पल।
वृन्दावन के बांके बिहारी,
हमसे पर्दा करो ना मुरारी ।
किशोरी कुछ ऐसा इंतजाम हो जाए।
जुबा पे राधा राधा राधा नाम हो जाए॥
नटवर नागर नंदा, भजो रे मन गोविंदा
शयाम सुंदर मुख चंदा, भजो रे मन
हम हाथ उठाकर कह देंगे हम हो गये राधा
राधा राधा राधा राधा
मेरा यार यशुदा कुंवर हो चूका है
वो दिल हो चूका है जिगर हो चूका है
ये सारे खेल तुम्हारे है
जग कहता खेल नसीबों का
ज़रा छलके ज़रा छलके वृदावन देखो
ज़रा हटके ज़रा हटके ज़माने से देखो
कोई पकड़ के मेरा हाथ रे,
मोहे वृन्दावन पहुंच देओ ।
बांके बिहारी की देख छटा,
मेरो मन है गयो लटा पटा।
यह मेरी अर्जी है,
मैं वैसी बन जाऊं जो तेरी मर्ज़ी है
तेरे दर पे आके ज़िन्दगी मेरी
यह तो तेरी नज़र का कमाल है,
श्यामा प्यारी मेरे साथ हैं,
फिर डरने की क्या बात है
तुम रूठे रहो मोहन,
हम तुमको मन लेंगे