Share this page on following platforms.
Download Bhagwad Gita 6.5 Download BG 6.5 as Image

⮪ BG 6.4 Bhagwad Gita Brahma Vaishnava Sampradaya BG 6.6⮫

Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 5

भगवद् गीता अध्याय 6 श्लोक 5

उद्धरेदात्मनाऽऽत्मानं नात्मानमवसादयेत्।
आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः।।6.5।।

हिंदी अनुवाद - स्वामी तेजोमयानंद

।।6.5।। मनुष्य को अपने द्वारा अपना उद्धार करना चाहिये और अपना अध पतन नहीं करना चाहिये क्योंकि आत्मा ही आत्मा का मित्र है और आत्मा (मनुष्य स्वयं) ही आत्मा का (अपना) शत्रु है।।

Brahma Vaishnava Sampradaya - Commentary

Only by constant endeavour with faith and determination is one able to detach themselves from ego sense and misidentification with their bodily activities and be in equiminity.