Share this page on following platforms.
Download Bhagwad Gita 3.16 Download BG 3.16 as Image

⮪ BG 3.15 Bhagwad Gita Hindi Translation BG 3.17⮫

Bhagavad Gita Chapter 3 Verse 16

भगवद् गीता अध्याय 3 श्लोक 16

एवं प्रवर्तितं चक्रं नानुवर्तयतीह यः।
अघायुरिन्द्रियारामो मोघं पार्थ स जीवति।।3.16।।

हिंदी अनुवाद - स्वामी रामसुख दास जी ( भगवद् गीता 3.16)

।।3.16।।हे पार्थ जो मनुष्य इस लोकमें इस प्रकार परम्परासे प्रचलित सृष्टिचक्रके अनुसार नहीं चलता वह इन्द्रियोंके द्वारा भोगोंमें रमण करनेवाला अघायु (पापमय जीवन बितानेवाला) मनुष्य संसारमें व्यर्थ ही जीता है।

हिंदी अनुवाद - स्वामी तेजोमयानंद

।।3.16।। जो पुरुष यहाँ इस प्रकार प्रवर्तित हुए चक्र का अनुवर्तन नहीं करता हे पार्थ इंन्द्रियों में रमने वाला वह पाप आयु पुरुष व्यर्थ ही जीता है।।