Share this page on following platforms.
Download Bhagwad Gita 3.14 Download BG 3.14 as Image

⮪ BG 3.13 Bhagwad Gita Shri Vaishnava Sampradaya BG 3.15⮫

Bhagavad Gita Chapter 3 Verse 14

भगवद् गीता अध्याय 3 श्लोक 14

अन्नाद्भवन्ति भूतानि पर्जन्यादन्नसम्भवः।
यज्ञाद्भवति पर्जन्यो यज्ञः कर्मसमुद्भवः।।3.14।।

हिंदी अनुवाद - स्वामी रामसुख दास जी ( भगवद् गीता 3.14)

।।3.14 3.15।।सम्पूर्ण प्राणी अन्नसे उत्पन्न होते हैं। अन्न वर्षासे होता है। वर्षा यज्ञसे होती है। यज्ञ कर्मोंसे निष्पन्न होता है। कर्मोंको तू वेदसे उत्पन्न जान और वेदको अक्षरब्रह्मसे प्रकट हुआ जान। इसलिये वह सर्वव्यापी परमात्मा यज्ञ (कर्तव्यकर्म) में नित्य प्रतिष्ठित है।

Shri Vaishnava Sampradaya - Commentary

There is no commentary for this verse.