Share this page on following platforms.
Download Bhagwad Gita 18.45 Download BG 18.45 as Image

⮪ BG 18.44 Bhagwad Gita Shri Vaishnava Sampradaya BG 18.46⮫

Bhagavad Gita Chapter 18 Verse 45

भगवद् गीता अध्याय 18 श्लोक 45

स्वे स्वे कर्मण्यभिरतः संसिद्धिं लभते नरः।
स्वकर्मनिरतः सिद्धिं यथा विन्दति तच्छृणु।।18.45।।

हिंदी अनुवाद - स्वामी रामसुख दास जी ( भगवद् गीता 18.45)

।।18.45।।अपनेअपने कर्ममें तत्परतापूर्वक लगा हुआ मनुष्य सम्यक् सिद्धि(परमात्मा)को प्राप्त कर लेता है। अपने कर्ममें लगा हुआ मनुष्य जिस प्रकार सिद्धिको प्राप्त होता है? उस प्रकारको तू मेरेसे सुन।

Shri Vaishnava Sampradaya - Commentary

Every human achieves samsiddham or self-realisation by perfectly executing their own natural prescribed duty according to qualification as ordained by Vedic scriptures. How this is accomplished is explained next by Lord Krishna.